BlissfulCouple

अर्हम ब्लिस्फुल कपल।

परिचय


भौतिकता की चकाचौंध एवं संस्कारशून्यता के कारण जो रिश्ता सात जन्मों तक निभाने का सपना-आदर्श-भावना रहती थी, वह आज काँच के बर्तन के समान टूट रहा है। दाम्पत्य जीवन संघर्ष -तनाव-अवसाद का पर्याय बनता जा रहा है। माँ-बाप के इन संघर्ष-कलह-तनाव का शिकार बच्चे हो रहे हैं । जब बात तलाक तक जा पहुँचती है, पति-पत्नी शायद दोनों स्थिर हो जाते हैं पर बच्चों की ज़िंदगी के सारे ताने-बाने उघड़ जाते हैं।
आज दाम्पत्य जीवन की स्थिति बहोत दुखदायी है। तलाक लें, तब भी बदतर, ना लें तब भी बदतर। पारिवारिक त्रासदी, आत्महत्या, व्यसनाधीनता-संस्कारशून्यता का मूलस्त्रोत दाम्पत्य जीवन की विकृति है। ब्लिस्फुल कपल का प्रथम चरण है जीवन में दिव्य प्रेम सबंधों की अनुभूति करवाना। सह-जीवन दोनों का होता है। सह-जीवन में अच्छा या बुरा जो भी है, उसका सारा श्रेय एवं दायित्व भी दोनों पर होता है। आत्मा दिव्य है और दिव्यता में जीने वाला देव होता है। देह नगण्य एवं व्यक्ति महत्वपूर्ण होता है – इस सोच से दिव्य संस्कृति का जन्म होता है। मनुष्य जब दिव्य होता है, तब देवता भी उसे नमस्कार करते हैं। मनुष्य की इसी दिव्यता को उभारने के लिए अर्हम् ब्लिस्फुल कपल शिविर का आयोजन होता है।
अर्हम् ब्लिस्फुल कपल पद्धति से दाम्पत्य जीवन के सबंधों में दिव्यता, दॄष्टि में स्नेह, भाषा में माधुर्य, व्यवहार में संयम व सहयोग के साथ दंपति एक अनूठी जीवन कला के कलाकार बनते हैं। आइये अर्हम् ब्लिस्फुल कपल को विश्व धर्म बनाएं। मधुर सम्बन्ध में पनप रही कटुता को दूर करने के लिए पूज्य गुरुदेव श्री ऋषि प्रवीण के मार्गदर्शन में, परिवार की नीव एवं बच्चों का भविष्य उज्जवल बने, इसलिए ब्लिस्फुल कपल शिविर का लाभ लेवें। इसका प्रशिक्षण 2001, जोधपुर से प्रारम्भ हुआ|

यह कोर्स क्यों करना है?

अपने जीवनसाथी को अपना जीवन सारथी बनाने की कला सीखने के लिए, युगल जीवन को शिखर पर ले जाने के लिए ब्लिस्फुल कपल का प्रशिक्षण जरूर लेवें।
Contact no. – 9884991000


विधि

सिर्फ स्वयं के लिए नहीं बल्कि समग्र विश्व की शांति, सौख्य और समृद्धि की भावना से – इस शिविर में युगलों को दो महत्वपूर्ण साधना सिखाई जाती है –
1. हस्त सम्पुष्ट मंगल साधना, क्षमापना-आलोचना
2. ऊर्जा प्रदान तथा ऊर्जा ग्रहण करने की साधना
इस शिविर में सात (7) सत्र होते हैं:
1. कैसे बनाएं दिव्य रिश्ते?
2. सम्पुष्ट मंगल ध्यान द्वारा परस्पर में स्थित भगवत शक्ति का जागरण
3. कैसे संघर्ष करें – इसका प्रशिक्षण?
4. विवाद नहीं संवाद
5. पति-पत्नी द्वारा एक-दूसरे की गलती का विश्लेषण नहीं, सुधार करने में मदद करना
6. ऊर्जा प्रदान एवं ऊर्जा ग्रहण करने की साधना
7. सुरक्षा एवं उज्जवल भविष्य का निर्माण। तीर्थमय जीवन शैली का प्रबंधन – प्रशिक्षण दिया जाता है।