UttaradhyayanSutra-21-DaysAnushthan

२१ दिवसीय श्रुतदेव आराधना

निर्वाण कल्याणक की बेला में, समवशरण की प्रत्यक्ष अनुभूति। परमात्मा के अंतिम शब्दों का साक्षात्कार।
उपाध्यायश्री की मौन साधना से उच्चतम शिखर को छूता, चातुर्मास का यह शिखर कार्यक्रम।
यह अनुभूति शब्दों में बयान हो पाना नामुमकिन है।
ऐसी निर्वाण कल्याणक की साधना में, अनुष्ठान में जुड़ने और जोड़ने का अवसर ना गवाएं।

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अपने परमपिता के अंतिम शब्दों में जीवन का सार है, हर पन्ने के रहस्य को समझाते, गुरुवार की वाणी से मानो जैसे साक्षात प्रभु फरमाते।


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श्रुतदेव आराधना

श्रद्धेय मार्गदर्शक है यह प्रभुवाणी
जन-जन में प्रतिष्ठित हो जिनवाणी।
प्रभु महावीर का वरदान
उत्तराध्ययन सूत्र है महान।
जो जीवन में उतारेगा
कल्याण उसका हो जाएगा।

परमपिता भगवान महावीर की अंतिम देशना/प्रवचन है श्री उत्तराध्ययन सूत्र। परमपिता का दिया हुआ चरम-परम मंगल वचन।
21,000 साल तक जो प्रश्न हमारे सामने आएंगे, उनका उत्तर है, समाधान है श्री उत्तराध्ययन सूत्र, जो भगवान महावीर ने पहले ही बता दिया है। ऐसे जियेंगे तो जीवन में धर्म होगा। जीवन में इधर-उधर भटकने की तो ज़रूरत रहेगी ही नहीं और जीवन सफल होगा। श्रद्धा को बोधसंपन्न बनाने के लिए परमात्मा प्रभु महावीर की चरम-परम देशना के रूप में प्रसिद्ध है – आने वाली पीढ़ी भगवान की परम-चरम मंगल वरदान से जुडी रहे इसलिए अपने परिवार में प्रतिदिन आराधना करनी ही चाहिए।
इस अभियान द्वारा आज तक हज़ारों व्यक्ति श्री उत्तराध्ययन सूत्र की 11 गाथाओं की श्रुतदेव आराधना करते हैं एवं सामुहिक आराधना के लिए गुरूवार को प्रातः8:15 से 9:00 बजे तक अपने-अपने क्षेत्र के धर्मस्थान में एकत्रित होकर धर्म आराधना करते हैं।
इंदौर, अहमदनगर, आकुर्डी, चिंचवड़, पूना, मध्यप्रदेश, जालंधर, पंजाब आदि क्षेत्रों सामूहिक श्रुतदेव आराधना का क्रम अनेक वर्षों मे चल रहा है।
श्रुतदेव के आराधन से, हर क्षण बन जाए मंगल
युगों-युगों तक जिनधर्म ही हो, हम सभी का एकमात्र सम्बल।।
श्री उत्तराध्ययन सूत्र तीर्थंकर महावीर स्वामी के अंतिम प्रवचनों का एक अनमोल धर्मग्रंथ है, जिसमे जीवन का सर्वांगीण विवेचन है। यह साम्प्रदायिक नेता-मुक्त, असाम्प्रदायिक अभिनिवेश मुक्त बाह्यी कर्मकांड आडम्बर से मुक्त, शुद्ध जीवन धर्म की सर्वकल्याणमयी, मंगलमयी प्रेरणा का विश्वकोश है।
तीर्थंकर महावीर स्वामी का अंतिम प्रवचन सुनना व उसे स्वीकार करना हमारा परम् कर्तव्य बनता है।

ध्येय: हर व्यक्ति को परमात्मा के दिव्य ज्ञान से जोड़ना है। जीवन की प्रत्येक समस्या का समाधान परमात्मा के दिव्य वचनों से प्राप्त करना।

उद्देश्य: सभी लोग परमात्मा के दिव्य ज्ञान से जुड़कर जीवन में आने वाली हर छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान प्राप्त करें। परिवार-आँगन श्रुतदेव आराधना-भक्ति से पावन हो। जीवन में संक्लेश नहीं आये।

क्या होगा: भगवत वचनों की आराधना से जीवन में दिव्यता आएगी। संक्लेश दूर होगा।

ध्यान रखिये: यह आराधना/भक्ति है, स्वाध्याय नहीं।
इसकी आप 24×7 यानी चौबीस घंटे सप्ताह भर कभी भी आराधना कर सकते हैं। इस आराधना को कोई भी कर सकता है।
कैसे जुड़ें: श्रीमद उत्तराध्ययन सूत्र को आस्था-श्रद्धा भक्तिपूर्वक घर पर रखें। सविधि रोज़ कम से कम 11 गाथाओं की आराधना करें।

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