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अर्हम् विज्जा, अर्हम् शासन, अर्हतता

ऋषि प्रवीण

गुरुदेव श्री ऋषि प्रवीण एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं। एक विचारक, एक वैज्ञानिक, एक मनोवैज्ञानिक, एक तत्त्वज्ञानी, एक धर्मगुरु। और केवल एक शब्द में वर्णन करना हो तो वो एक व्याख्यात्मक है – अर्थात वो जो समस्त बातों की बेहद सुन्दर और वास्तविक पुनर्व्याख्या देते है।

अर्हम् विज्जा

हर वस्तु व्यक्ति और चैतन्य में जो एक्सट्रीम (Extreme), अंतिम, सर्वोच्च सामर्थ्य होता है उसको अर्हतता कहते हैं। ऐसी अर्हतता जिनमें व्यक्त हो गयी उनको कहते हैं – अर्हम्।
अर्हम् विज्जा- अंतर की सर्वश्रेष्ठता को उजागर करने की विद्या– टेक्नोलॉजी (Technology), फिलॉसोफी (Philosophy), मेथड (Method)। हर धर्म, परम्परा का, हर साधना का एक लक्ष्य रहता है कि जीवन की सर्वोच्च श्रेष्ठता को प्राप्त करें। अर्हम् विज्जा के अंतरंग में चल रहे प्रोग्राम (Program) इसी एक लक्ष्य को लेकर के चल रहे हैं। व्यक्ति के अंदर की, परिवार के अंदर की, संघ और समाज के अंदर की जो सर्वश्रेष्ठता है – उसको प्रकट करने वाली प्रक्रिया, नॉलेज (Knowledge) – इसका एक इंस्टिटूशन (Institution) – अर्हम् विज्जा।

अर्हम् विज्जा और अर्हत शासन

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अर्हम् विज्जा

जिस विद्या से आत्मा शक्ति का जागरण हो, उसका नाम है अर्हम् विज्जा|
जीवन के हर पड़ाव पर, हर उतार-चढ़ाव पर, एक छिपा हुवा अवसर होता है - भगवान् बनने और बनाने का|
जीत के हराना नहीं, स्वयं भी जीतके दुसरो को जीताना| ये कला है और इस कला को अवगत करवाती है अर्हम् विज्जा|
अर्हम् विज्जा के अंतर्गत ऐसे प्रशिक्षण के कार्यक्रम है जिसे दुनिया में हज़ारों लोगों ने अपनाया और बदलाव को महसूस किया है|

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अर्हत शासन

आत्म शक्ति का जागरण ये है आनंदतीर्थ का अरमान|
व्यक्ती, परिवार और समाज की शक्ति को सही दिशा मिल जाए, सही ऊर्जा सही ऊर्जा से मिल जाए तो विश्वकल्याण का सपना दूर नहीं| इन तीनों ही आयामों को संभालना जरुरी है|
इसी उद्देश्य से - तीर्थंकर परमात्मा प्रभु महावीर के दिव्या वरदानों को बहोत ही सहजता और सरलता से समाजव्यापी कार्यक्रमों के रूप में गुरुदेव ने विश्व को प्रदान किये है|
आनंदतीर्थ - आनंद लेने का, आनंद देने का और आनंदमय बनाने का तीर्थ है| परमात्मा प्रभु महावीर और गुरुअनंद की असीम कृपा से गुरुदेव ऋषी प्रवीण द्वारा अर्हत शासन एक निर्मल अलौकिक वरदान है|

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