TapSadhana

तप साधना


तबेण पडिसुज्झई, तवसा धुणइ पुराण पावर ।

जैसे आगम वचन तपशक्ति के प्रतिपादक हैं।

तप को प्रभु महावीर ने केवल शारीरिक स्तर पर ही नहीं अपितु (तवो जाई जीवो जोई ठाणं (तप ज्योति हैं, आत्मा दीपक हैं) कहा हैं ।) परम्परा
में, जनशभ्रुति में, लोकप्रसिछ कथाओं में जो तप साधना की महिमा हैं – उसे यथोचित रूप से जीवन में अनुभूत करने की प्रक्रिया के साथ तप्र साधना
की विधि विधान के साथ तपस्या करना चातुर्मास में सिख्राया जाता हैं।
आचार्य भणवंत श्री आनंदऋषिजी महाराज का जन्मोत्सव पिछले चार
वर्षों से अठाई तप महोत्सव के रूप में संपन्न हो रहा हैं। गत वर्ष
अहमदनगरमें 78] अठाई तप के पचक्रख्राण एक साथ हुए । इस वर्ष 008
अठाईयों का लक्ष्य हैं, जिसमें अहमदनगर से,

आचार्य भगवंत की तीर्थभूमि से 25 तपस्वी आनंद जन्‍्मोत्सव के अठाई महोत्सव में सहभागी हो रहे हैं । इस वर्ष आनंद जन्मोत्सव दि, 4 से || अगस्त 200 तक हैं | दि. 3 अगस्त 200 को दोपहर 3 बजे तपस्वियों का ध्यान-साधना एवं णमोत्थुणं आराधना विधि का प्रशिक्षण दिया जाएगा । आपसे । आग्रह हैं कि जीवन में एक बार आनंद अट्ठाई महोत्सव में सहभाग ले ।

गुरूभक्ति – तप साधना – तीर्थंकर आराधना के बनें।