A family... whose every member has a sense of love and humility towards each other.
A family... where every member is ready to help each other.
A family... where every member's dreams come true.
A family... in which everyone's perspective becomes the same.
A family... where all the members should be eager to give more and more love to each other.
"This is the goal of Arham family". Arham Art of Family Life is a developed method of taking everyone along with love.
 
ARHAT FAMILY
अर्हत कोई शब्द मात्र नहीं. यह एक जागृत अवस्था है। जब व्यक्ति अपनी सुप्त, असीम एवं अनंत सभावनाओं को पहचानकर उन्हें जागृत करता है,  अपने भीतर निहित दिव्य शक्ति को सक्रिय करता है तभी वह  अर्हत्व को प्राप्त कर सकता है।
 प्रत्येक मानव के अंतःकरण में अनंत शक्तियाँ, अनंतगुण, अनंत प्रकाश विद्यमान है किन्तु अज्ञान प्रमाद के कारण वे सुप्त  अवस्था में रहते हैं। उन शक्तियों को जागृत करने हेतु आवश्यक है दिव्य चेतना से जुडना, तीर्थंकर परमात्मा की पवित्र उर्जा, Super Power से आत्मसंबंध स्थापित करना।
यदि एक व्यक्ति जागृत होता है तो सिर्फ उसका हो जीवन परिवर्तित होता है परंतु यदि संपूर्ण परिवार उस दिव्य शक्ति  से दिव्य ऊर्जा से जुड़ जाए तो वह केवल एक परिवार मात्र नहीं तो एक तीर्थ बन जाता है। अर्हत् परिवार बन जाता है। ऐसा परिवार जहाँ- 
साधना के साथ साधना हो, संपन्नता के साथ प्रसन्नता हो, Richness के व्याथ Happiness हो, Facility के साथ Spirituality हो, प्रेम के साथ आशीर्वाद की सतत वर्षा हो।
यदि  हम अपने परिवार में समृध्दि, आनंद और प्रसन्नता के बीज बोना चाहते हैं तो हमें अपने घर को, पारवार को तीर्थंकर परमात्मा की दिव्य ऊर्जा से जोडना होगा । 
आचार्य सम्राट प. पू श्री. आनंदऋषिजी म. सा. का सपना था हर परिवार तीर्थंकर से जुड़े,  अर्हत् की ऊर्जा से, दिव्य शक्ति से परिवार ऊर्जामय हो,  शक्तिसंपन्न हो। गुरूदेव के सपने को साकार करने के लिए अर्हम् विज्जा प्रणेता उपाध्याय प्रवर प.पू. श्री प्रवीणऋषिजी म. सा ने ARHAT FAMILY का उपक्रम,  अनूठा कार्यक्रम प्रारंभ किया है। यह किसी संप्रदाय या परंपरा का कार्यक्रम नहीं है यह सिर्फ सर्वकल्याण का कार्यक्रम है। तो आईए पू. गुरुदेव के सपने को तथा उपाध्याय भगवंत के Mission को सच करने के लिए हम प्रयास करेंगे  की हमारा परिवार अपन घर में तीर्थ की अनुभूति करे, आनंद की अखंड धारा प्रवाहित करें।